पहली बूंद
यहाँ कक्षा 6 हिंदी (एनसीईआरटी — मल्हार) की कविता "पहली बूँद" का भावार्थ
कविता — "पहली बूँद" (लेखक: केदारनाथ अग्रवाल)
भावार्थ
कवि इस कविता में वर्षा की पहली बूँद के आने से प्रकृति और मन में उत्पन्न आनंद, उत्साह और उल्लास को दर्शा रहे हैं। गर्मी की तपन और सूखी धरती के बाद जब पहली बूँद गिरती है, तो धरती की सूँखी छाती पर जैसे जीवन का संचार हो जाता है। किसान खुश हो जाता है क्योंकि उसकी खेती को पानी मिलेगा, बच्चे बारिश में नाचते हैं, पेड़-पौधे खिल उठते हैं, और चारों तरफ हरियाली छा जाती है।
कवि "पहली बूँद" को जीवन देने वाली, आशा की प्रतीक और खुशहाली लाने वाली बताता है। वह प्रकृति और इंसान के आपसी संबंध को भी दर्शाता है।
शब्दार्थ (Word Meanings):
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शब्द
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अर्थ
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बूँद
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पानी की छोटी बिंदु
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सिंचित
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पानी देना, सींचना
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तरु
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वृक्ष, पेड़
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प्यासा
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जिसे पानी की आवश्यकता हो
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भूमि
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ज़मीन
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धरा
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पृथ्वी, धरती
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अम्बर
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आकाश
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शोभा
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सुंदरता, आकर्षण
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विहँसना
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हँसना, मुस्कराना
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उमड़ना
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अचानक बहुत मात्रा में आना
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उल्लास
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खुशी, आनंद
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जीवनदायिनी
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जीवन देने वाली
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पहली बूँद – NCERT समाधान
1. सोच-विचार के लिए
*प्रश्न: बारिश की पहली बूँद से धरती का हर्ष कैसे प्रकट होता ह?
*उत्तर: धरती के सूखे होंठों पर बारिश की बूँद अमृत के समान गिरती है, मानो वर्षा होने से बेजान और सूखी पड़ी धरती को नवीन जीवन ही मिल गया हो। इस प्रकार बारिश की पहली बूँद से धरती का हर्ष प्रकट होता हैं ।
*प्रश्न: कविता में आकाश और बादलों को किनके समान बताया गया हैं?
*उत्तर: प्रस्तुत कविता के अनुसार, नीले आकाश को नीली आँखों के समान और काले बादल को उन नीली-नीली आँखों की काली पुतली के समान बताया गया हैं ।
2. कविता की रचना
*प्रश्न: ‘आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर’ कविता की इस पंक्ति का सामान्य अर्थ क्या ?
*उत्तर: इस पंक्ति में कवि ने आकाश में उड़ते हुए बादलों की तुलना समुद्र से की है, जो बिजली की चमक के साथ स्वर्णिम पंखों के समान प्रतीत हो रहे हैं। यह दृश्य दर्शाता है कि बादल आकाश में गतिशील हैं और उनकी चमकदार उपस्थिति समुद्र की लहरों जैसी हैं ।
3. शब्दार्थ / भावार्थ
पंक्ति ‘धरती के सूखे अधरों पर, गिरी बूँद अमृत सी आर।’
भावार्थ धरती के सूखे होंठों पर बारिश की बूँद अमृत के समान गिरती है, जिससे सूखी पड़ी धरती को नया जीवन मिलताहै।
पंक्ति ‘वसुंधरा की रोमावलि - सी, हरी दूब पुलकी मुस्कई।’
भावार्थ धरती की सतह पर उगी हरी दूब को कवि ने वसुंधरा की रोमावलि के समान बताया है, जो वर्षा के कारण प्रसन्न होकर मुस्कुरा रहीहै।
4. अतिरिक्त प्रश्न
प्रश्न:: धरती को ‘बूढ़ी’ कहने का क्या तात्पर् है?
उत्तर: धरती को ‘बूढ़ी’ कहने का तात्पर्य है कि वह लंबे समय से सूखी और बेजान पड़ी थी। वर्षा की पहली बूँद से उसमें नया जीवन संचारित होता है, जिससे वह फिर से हरी-भरी और जीवंत हो जात है |
प्रश्न:: वर्षा की पहली बूँद से प्रकृति में क्या परिवर्तन होतेहैं ?
उत्तर: वर्षा की पहली बूँद से सूखी धरती हरी-भरी हो जाती है, बीज अंकुरित होते हैं, पेड़-पौधों में नई पत्तियाँ आती हैं, और वातावरण में ताजगी और प्रसन्नता फैल जात है |
मेरी समझ स PAGE 27 NCERT SOLUTION
- कविता में ‘नव-जीवन की ले अँगड़ाई’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
बूँद
यहाँ 'नव-जीवन की ले अँगड़ाई' बूँद के लिए प्रयोग किया गया है, क्योंकि बूँद के गिरने से जीवन का संचार होता है, जैसे नवीनीकरण और ताजगी की शुरुआत होती है।
- ‘नीले नयनों-सा यह अबर, काली पंतली-से ये जलधर’ में ‘काली पंतली’ है—
बादल
इस वाक्य में 'काली पंतली' का संदर्भ बादल से है, क्योंकि बादल आमतौर पर काले होते हैं और उनका रूप काली पंतली जैसा प्रतीत होता है।
मिलकर करें मिलान PAGE 27
यहां कविता की पंक्तियों और उनके भावार्थों का मिलान इस प्रकार होगा:
- आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर
आकाश
- बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई
बादल
- नीले नयनों सा यह अम्बर, काली पंतली-से ये जलधर।
मेघ-गर्जना
- वसुंधरा की रोमावलि-सी, हरी दबू लकी-मसकाई।
हरी दबू
पंक्तियों का विश्लेषण PAGE 28
इन पंक्तियों का विश्लेषण करने से हमें प्रकृति के विभिन्न रूपों के बारे में गहरी समझ मिलती है। आइए इन पंक्तियों को एक-एक करके समझें:
1. "आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर,
बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई।”**
- व्याख्या:
इस पंक्ति में कवि ने प्रकृति की अद्भुत सुंदरता और ऊर्जा को चित्रित किया है। "आसमान में उड़ता सागर" का अर्थ है बादल जो आकाश में फैले हुए हैं, जैसे वे एक सागर की तरह चलते हैं। "बिजलियों के स्वर्णिम पर" से मतलब है कि बिजली के कंठ में चमक रही हैं, जो दृश्य को स्वर्णिम रूप में बदल देती हैं। "नगाड़े जगा रहे हैं" का संकेत है कि बादल में गड़गड़ाहट हो रही है, जैसे नगाड़े की आवाज हो। और "धरती की तरुणाई" का मतलब है कि बादल की बारिश से धरती का पुनः जीवन और ताजगी लौट आती है।
- कविता में विचार:
यह पंक्ति प्राकृतिक घटनाओं की सुंदरता और शक्तियों को दर्शाती है, जहां बादल न केवल आकाश में उड़ते हैं, बल्कि धरती पर जीवन का संचार भी करते हैं। यह जीवन में नवीनीकरण का प्रतीक है।
2. "नीले नयनों-सा यह अबर, काली पंतली-से ये जलधर।
करुणा-विगलित अश् बहाकर, धरती की रुचिर-प्यास बुझाई।”**
- व्याख्या:
"नीले नयनों-सा यह अबर" से कवि ने आकाश और बादल को तुलना की है, जैसे नीले नयन सुंदर होते हैं, वैसे ही आकाश और बादल भी सुंदर और आकर्षक होते हैं। "काली पंतली-से ये जलधर" से यहाँ काले बादल और उसमें से निकलने वाली बारिश की बूँदों का चित्रण है। "करुणा-विगलित अश् बहाकर" का अर्थ है कि ये बादल धरती पर करुणा की तरह बरसते हैं, जिससे धरती की प्यास बुझती है और उसका जीवन संजीवित होता है।
- कविता में विचार:
यह पंक्ति दर्शाती है कि प्रकृति हमें जीवन देने के लिए हमेशा हमारे पास आती है। बादल और बारिश, जैसे एक करुणा और संजीवनी के रूप में आते हैं, हमारे जीवन को नवीनीकरण और ऊर्जा प्रदान करते हैं।
कुल मिलाकर:
इन दोनों पंक्तियों में कवि ने प्राकृतिक घटनाओं जैसे बादल, बारिश और आकाश की सुंदरता को जीवन और तरुणाई के प्रतीक के रूप में चित्रित किया है। यहाँ एक गहरी करुणा और ऊर्जा की भावना व्यक्त की जा रही है, जो मानव जीवन को ताजगी और शक्ति प्रदान करती है। ये पंक्तियाँ हमें यह सिखाती हैं कि प्रकृति हमारी मदद करने के लिए हमेशा मौजूद रहती है और हमें जीवन का संचार करती है।
सोच-विचार के लिए PAGE 28
1. बारिश की पहली बूँद से धरती का हर कष्ट कैसे प्रकट होता है?
- बारिश की पहली बूँद से धरती के कष्ट का प्रकट होना इस अर्थ में है कि जैसे ही पहली बूँद धरती पर गिरती है, वह सूखे और तपते हुए धरती के कष्ट को शांत करती है। बारिश की बूँद के गिरने से धरती को ठंडक मिलती है और उसकी प्यास बुझती है, जैसे एक लंबे समय से तपते हुए मनुष्य को पानी मिल जाता है, और उसका दुख खत्म हो जाता है। यह प्रतीकात्मक रूप से धरती के कष्टों के शांत होने को दर्शाता है।
2. कविता में आकाश और बादलों को किनके समान बताया गया है?
- कविता में आकाश को "नीले नयनों-सा" और बादलों को "काली पंतली-से जलधार" के रूप में दर्शाया गया है। यहाँ आकाश को नीले नयनों के समान और बादलों को काली पंतली के रूप में चित्रित किया गया है, जिससे उनकी सुंदरता और गहराई का चित्र उभरता है। यह तुलना उन्हें एक आकर्षक और स्वाभाविक रूप से जीवंत बनाती है, जैसे नीले नयन किसी को आकर्षित करते हैं, वैसे ही आकाश और बादल भी मन को आकर्षित करते हैं।
शब्द एक अर्थ अनेक PAGE 28
"फूट" शब्द का प्रयोग विभिन्न संदर्भों में अलग-अलग अर्थों में किया जा सकता है। यहां कुछ वाक्य दिए जा रहे हैं, जिनमें "फूट" शब्द का विभिन्न अर्थों में प्रयोग किया गया है:
- फूट डालना –
"अंग्रेजों की नीति थी 'फूट डालो और राज करो'।"
(यहां "फूट डालना" का अर्थ है किसी के बीच मतभेद उत्पन्न करना, ताकि उनका नियंत्रण आसानी से किया जा सके।)
- घड़ा फूटना –
"वह बहुत जोर से गिरा, और घड़ा फूट गया।"
(यहां "फूटना" का अर्थ है किसी वस्तु का टूटना या क्षतिग्रस्त होना।)
- फूटना (भावनाओं का) –
"उसकी आँखों से आँसू फूट पड़े, जब उसने अपने माता-पिता को खो दिया।"
(यहां "फूटना" का अर्थ है भावनाओं का अचानक बाहर आना, जैसे आँसू या क्रोध।)
- फूट (प्राकृतिक) –
"बारिश के बाद बर्फ के ढेर से पानी की धार फूट पड़ी।"
(यहां "फूटना" का अर्थ है किसी प्राकृतिक स्रोत से अचानक बहना या निकलना।)
- फूट (मज़ाक में) –
"उसकी बात सुनकर हम सब हंसी से फूट पड़े।"
(यहां "फूटना" का अर्थ है हंसी का अचानक आना, जैसे हंसी का अनियंत्रित रूप से बाहर निकलना।)
इन वाक्यों में "फूट" शब्द का प्रयोग अलग-अलग संदर्भों में हुआ है, जिससे इसका अर्थ बदलता है।
अनेक शब्दों के लिए एक शब्द PAGE 28
"धर" शब्द से बने कुछ शब्द और उनके अर्थ:
- धरती - पृथ्वी, भूमि।
- उदाहरण: धरती पर जीवन के विभिन्न रूप पाए जाते हैं।
- धरम - धार्मिक विश्वास, धर्म, कर्तव्य।
- उदाहरण: हर व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करना चाहिए।
- धर्मधर - जो धर्म का पालन करता है, धार्मिक व्यक्ति।
- उदाहरण: वह एक सच्चा धर्मधर है, जो हमेशा सत्य बोलता है।
- धरक - थरथराना या कांपना (कभी-कभी भावनाओं में उथल-पुथल को व्यक्त करने के लिए)।
- उदाहरण: उसके दिल में भय का धरक रहा था।
- धरन - धारण करना, स्वीकार करना।
- उदाहरण: उसने नया जिम्मा धरन किया है।
- धरणी - धरती, पृथ्वी।
- उदाहरण: धरती हमारी मातृभूमि है।
- धरण - स्थान या बिठाना, ग्रहण करना।
- उदाहरण: वह विचारों को अपने मन में धरण करता है।
इन शब्दों में "धर" शब्द का प्रयोग विभिन्न संदर्भों में हुआ है, जिससे इनके अर्थ अलग-अलग निकलते हैं।
भाग - A : बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) (प्रत्येक प्रश्न के चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए)
अनुच्छेद 1 पर आधारित प्रश्न:
- कवि ने पहली वर्षा की बूंद को किससे तुलना की है?
A) मोती
B) आँसू
C) अमृत ✅
D) जलधारा
- ‘हरी दूब पुलकी मुस्काई’ का क्या तात्पर्य है?
A) दूब दुखी थी
B) दूब ने बारिश से आनंद महसूस किया ✅
C) दूब सूख रही थी
D) दूब झड़ने लगी
- ‘वसुंधरा की रोमावलि’ किसे कहा गया है?
A) नदियों को
B) पहाड़ों को
C) हरी दूब को ✅
D) खेतों को
अनुच्छेद 2 पर आधारित प्रश्न:
- ‘नीले नैनों सा अंबर’ किसकी सुंदरता दर्शाता है?
A) धरती
B) आकाश ✅
C) नदी
D) वर्षा
- ‘जलधर’ शब्द का अर्थ है:
A) नदी
B) जलाशय
C) बादल ✅
D) समुद्र
- कवि ने बताया कि वर्षा ने किसकी ‘चिर-प्यास’ बुझाई?
A) पेड़ों की
B) बादलों की
C) धरती की ✅
D) नदियों की
✍️ भाग - B : रिक्त स्थान भरें
- धरती के _____ अधरों पर पहली बूंद गिरी।
✅ सूखे
- ‘हरी दूब पुलकी ______।’
✅ मुस्काई
- नीले नैनों सा यह ______।
✅ अंबर
- बूढ़ी धरती ______ बनने को ललचाई।
✅ शस्य-श्यामला
भाग - C : सही जोड़ों से मिलान कीजिए
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स्तंभ A
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स्तंभ B
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पहली बूंद
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अमृत समान
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हरी दूब
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मुस्काई
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नीला अंबर
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नीले नयन
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जलधर
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काले बादल
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बूढ़ी धरती
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शस्य-श्यामला बनने को ललचाई
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✅ सही मिलान:
1 – अमृत समान
2 – मुस्काई
3 – नीले नयन
4 – काले बादल
5 – शस्य-श्यामला बनने को ललचाई
भाग - D : लघु उत्तरीय प्रश्न (2-3 वाक्यों में उत्तर दें)
- कवि ने पहली बूंद की तुलना अमृत से क्यों की है?
✅ क्योंकि पहली वर्षा की बूंद धरती की सूखी प्यास को शांत करती है और जीवन में ताजगी लाती है, जैसे अमृत।
- कविता में धरती को ‘बूढ़ी’ क्यों कहा गया है?
✅ क्योंकि वह लंबे समय से सूखी पड़ी थी और उसमें जीवन का उत्साह नहीं था। वर्षा ने उसे फिर से जीवंत बना दिया।
- ‘करुणा-विगलित अश्रु बहाकर’ का क्या अर्थ है?
✅ इसका अर्थ है कि बादल ने दया से वर्षा की, जैसे आँसू बहा दिए हों।
Paragraph base mcq questions and answers
अनुच्छेद 1
धरती के सूखे अधरों पर,
गिरी बूंद अमृत सी आकर।
वसुंधरा की रोमावलि - सी,
हरी दूब पुलकी मुस्काई।
पहली बूंद धरा पर आई।।
प्रश्न 1:
कवि ने वर्षा की पहली बूंद को किसके समान बताया है?
A) आँसू
B) अमृत
C) मोती
D) जलधारा
✅ उत्तर: B) अमृत
प्रश्न 2:
'धरती के सूखे अधर' का अर्थ क्या है?
A) धरती की सुंदरता
B) धरती का जल से भीग जाना
C) सूखी पड़ी धरती
D) हरी-भरी धरती
✅ उत्तर: C) सूखी पड़ी धरती
प्रश्न 3:
'हरी दूब पुलकी मुस्काई' पंक्ति से क्या अभिव्यक्त होता है?
A) दूब की हानि
B) दूब का मुरझाना
C) दूब का प्रसन्न होना
D) दूब का जल में बह जाना
✅ उत्तर: C) दूब का प्रसन्न होना
प्रश्न 4:
कवि ने 'वसुंधरा की रोमावलि' किसे कहा है?
A) आकाश को
B) नदियों को
C) पहाड़ों को
D) हरी दूब को
✅ उत्तर: D) हरी दूब को
प्रश्न 5:
कविता के अनुसार पहली बूंद के गिरने से वातावरण में कैसा परिवर्तन आया?
A) अंधकार फैल गया
B) गर्मी बढ़ गई
C) जीवन में ताजगी और खुशी आ गई
D) धूल उड़ने लगी
✅ उत्तर: C) जीवन में ताजगी और खुशी आ गई
अनुच्छेद 2
नीले नैनों - सा यह अंबर,
काली पुतली - से यह जलधर।
करुणा - विगलित अश्रु बहाकर,
धरती की चिर - प्यास बुझाई।
बूढ़ी धरती शस्य - श्यामला
बनने को फिर से ललचाई।
पहली बूंद धरा पर आई।।
प्रश्न 1:
कवि ने 'अंबर' की उपमा किससे दी है?
A) काले बादल से
B) नीली पुतली से
C) नीले नयनों से
D) धरती से
✅ उत्तर: C) नीले नयनों से
प्रश्न 2:
'जलधर' शब्द का अर्थ क्या है?
A) धरती
B) बादल
C) नदी
D) समुद्र
✅ उत्तर: B) बादल
प्रश्न 3:
'करुणा-विगलित अश्रु बहाकर' पंक्ति का क्या आशय है?
A) दुखी होकर धरती रोने लगी
B) आकाश में आँधी आई
C) बादल ने दया से वर्षा की
D) धरती को जल पीने को नहीं मिला
✅ उत्तर: C) बादल ने दया से वर्षा की
प्रश्न 4:
'बूढ़ी धरती शस्य-श्यामला बनने को ललचाई' का क्या अर्थ है?
A) धरती बर्फ से ढक गई
B) धरती जलहीन हो गई
C) धरती फिर से हरी-भरी होने को लालायित है
D) धरती को बारिश पसंद नहीं है
✅ उत्तर: C) धरती फिर से हरी-भरी होने को लालायित है
प्रश्न 5:
इस अनुच्छेद का मुख्य भाव क्या है?
A) वर्षा से बर्बादी
B) धरती की जल की कमी
C) वर्षा की कृपा से धरती का पुनर्जीवन
D) आकाश का क्रोध
✅ उत्तर: C) वर्षा की कृपा से धरती का पुनर्जीवन