मातृभूमि
पाठ 1
ऊंचा खड़ा हिमालय------ पग पग छहर रही हैं।
शब्दार्थ (Word Meanings):
|
शब्द
|
अर्थ
|
|
ऊँचा
|
बहुत ऊपर, उन्नत
|
|
खड़ा
|
सीधा खड़ा हुआ
|
|
हिमालय
|
भारत का एक प्रमुख पर्वत श्रृंखला
|
|
आकाश
|
आसमान
|
|
चूमता
|
स्पर्श करता, छूता
|
|
चरण
|
पैर
|
|
तले
|
नीचे
|
|
झुक
|
नीचे की ओर झुका हुआ
|
|
सिंधु
|
समुद्र
|
|
झूमता
|
लहराता हुआ, नाचता हुआ
|
|
त्रिवेणी
|
तीन नदियों का संगम (गंगा, यमुना, सरस्वती)
|
|
लहर रही हैं
|
बह रही हैं, गति कर रही हैं
|
|
छटा
|
सुंदरता, शोभा
|
|
निराली
|
अनोखी, अलग
|
|
पग पग
|
हर कदम पर
|
|
छहर रही हैं
|
फैल रही हैं, बिखर रही हैं
|
भावार्थ / सारांश:
इस अनुच्छेद में कवि ने अपनी मातृभूमि की प्राकृतिक सुंदरता और गौरव का वर्णन किया है। वह बताते हैं कि—
- ऊँचा हिमालय पर्वत मानो आकाश को चूम रहा है,
- उसके नीचे विशाल समुद्र उसकी सेवा में झुककर लहराता है।
- गंगा, यमुना और त्रिवेणी जैसी पवित्र नदियाँ पूरे उल्लास से बह रही हैं,
- और देश के हर कोने में अद्भुत प्राकृतिक छटा (सौंदर्य) फैली हुई है।
मुख्य भाव:
यह अनुच्छेद भारत देश की भव्यता, सुंदरता और महानता को दर्शाता है। कवि मातृभूमि की प्राकृतिक शोभा देखकर गर्व और प्रेम से भर उठता है।
वह पुण्य-भूमि मेरी, ----- हो मस्त झाड़ियों में।
भावार्थ / सारांश:
इस अनुच्छेद में कवि अपनी मातृभूमि (भारत) की महानता, सुंदरता और प्राकृतिक सौंदर्य का गुणगान करता है। वह गर्व से कहता है कि—
- यह वही भूमि है जो पुण्य (पवित्र), स्वर्ण (कीमती), जन्मभूमि (जहाँ उसने जन्म लिया) और मातृभूमि (माँ जैसी) है।
- इस धरती की पहाड़ियों में अनेक सुंदर झरने गिरते हैं।
- यहाँ की झाड़ियों में चिड़ियाँ खुशी से चहचहा रही हैं।
मुख्य भाव:
कवि को अपनी मातृभूमि से अत्यंत प्रेम है। वह इसे पवित्र, मूल्यवान, जीवनदायिनी और सुंदर मानता है। मातृभूमि का प्राकृतिक सौंदर्य उसके मन को आनंद से भर देता है।
शब्दार्थ (Word Meanings):
|
शब्द
|
अर्थ
|
|
पुण्य-भूमि
|
पवित्र भूमि
|
|
स्वर्ण-भूमि
|
सोने जैसी कीमती भूमि
|
|
जन्मभूमि
|
वह स्थान जहाँ जन्म हुआ
|
|
मातृभूमि
|
माँ के समान देश
|
|
झरने
|
पहाड़ों से गिरने वाला पानी
|
|
पहाड़ियों
|
छोटे-छोटे पर्वत
|
|
चहक रही हैं
|
प्रसन्न होकर गा रही हैं, बोल रही हैं
|
|
मस्त
|
आनंद में, खुश
|
|
झाड़ियों
|
छोटे-छोटे पेड़ों या पौधों के समूह
|
अमराइयाँ घनी हैं,------- वह मातृभूमि मेरी।
भावार्थ / सारांश:
इस अनुच्छेद में कवि अपनी मातृभूमि की सुंदरता, सौंदर्य और उसकी जीवनदायिनी प्रकृति का वर्णन करता है। वह कहता है—
- यहाँ घनी अमराइयाँ (आम के पेड़ों के बाग) हैं, जिनमें कोयल मीठी आवाज़ में गा रही है।
- यहाँ से मलयगिरि पर्वत की ठंडी और सुगंधित हवा बह रही है, जो तन (शरीर) और मन (मन) दोनों को प्रसन्न कर देती है।
- यह वही भूमि है जो धर्म (नैतिकता व संस्कार), कर्म (कर्मभूमि), जन्म और मातृत्व का आधार है।
मुख्य भाव:
यह अनुच्छेद भारत की सुंदर, धार्मिक और कार्यप्रधान प्रकृति को दर्शाता है। कवि को अपनी मातृभूमि पर गर्व है — यह जीवन को सुंदर, पवित्र और सार्थक बनाती है।
शब्दार्थ (**** Meanings):
|
शब्द
|
अर्थ
|
|
अमराइयाँ
|
आम के पेड़ों का बाग
|
|
घनी
|
बहुत अधिक पेड़ों वाली, सघन
|
|
कोयल
|
एक मधुर स्वर वाली चिड़िया
|
|
पुकारती है
|
आवाज़ लगाती है, गाती है
|
|
मलय पवन
|
मलयगिरि की ठंडी, सुगंधित हवा
|
|
तन-मन
|
शरीर और मन
|
|
सँवारती है
|
सुंदर बनाती है, सजाती है
|
|
धर्मभूमि
|
धार्मिकता और संस्कारों की भूमि
|
|
कर्मभूमि
|
कर्म करने की भूमि (जहाँ कार्य होता है)
|
|
जन्मभूमि
|
जहाँ जन्म हुआ
|
|
मातृभूमि
|
माँ के समान देश
|
जन्मे जहाँ थे रघुपति, --------- वह जन्मभूमि मेरी।
भावार्थ / सारांश:
इस अनुच्छेद में कवि भारत देश के धार्मिक, आध्यात्मिक और नैतिक गौरव का चित्रण करता है। वह बताता है—
- यह वही पवित्र भूमि है जहाँ भगवान राम (रघुपति) और माता सीता का जन्म हुआ।
- यहीं श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया, जो आज भी मानवता के लिए एक मार्गदर्शक ग्रंथ है।
- इसी भूमि पर भगवान बुद्ध (गौतम बुद्ध) का जन्म हुआ, जिन्होंने अपने उपदेशों से करुणा, अहिंसा और ज्ञान का प्रचार किया।
- यह भूमि युद्ध की भूमि (धर्मयुद्ध की), बुद्ध की भूमि (ज्ञान और शांति की), माँ के समान पूजनीय और जन्मभूमि है।
मुख्य भाव:
भारत देश धर्म, ज्ञान, करुणा और सत्य की भूमि है। यहाँ जन्मे महापुरुषों ने संपूर्ण संसार को सही दिशा, शिक्षा और मूल्य दिए। कवि को गर्व है कि वह ऐसी भूमि की संतान है।
शब्दार्थ (Word Meanings):
|
शब्द
|
अर्थ
|
|
रघुपति
|
भगवान श्रीराम
|
|
सीता
|
भगवान राम की पत्नी, आदर्श नारी
|
|
श्रीकृष्ण
|
भगवान विष्णु के अवतार, गीता के उपदेशक
|
|
गीता
|
भगवद्गीता, श्रीकृष्ण द्वारा दिया गया ज्ञान
|
|
पवित्र
|
शुद्ध, धर्मिक
|
|
गौतम
|
गौतम बुद्ध, करुणा और शांति के प्रचारक
|
|
यश
|
प्रसिद्धि, सम्मान
|
|
दया
|
करुणा, सहानुभूति
|
|
दिशा
|
मार्ग, रास्ता
|
|
युद्धभूमि
|
जहाँ धर्मयुद्ध हुए (जैसे कुरुक्षेत्र)
|
|
बुद्धभूमि
|
वह भूमि जहाँ बुद्ध का जन्म और ज्ञान हुआ
|
|
मातृभूमि
|
माँ के समान देश
|
|
जन्मभूमि
|
जन्म लेने की भूमि
|
NCERT SOLUTION
मेरी समझ स
(1) सिंधु
(2) भारत की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की गई है।
मिलान करें —
शब्द और उनके सही अर्थ या संदर्भ:
|
शब्द
|
अर्थ या संदर्भ
|
|
1. हिमालय
|
10. भारत की उत्तरी सीमा पर फैली पर्वत-माला।
|
|
2. त्रिवेणी
|
4. तीन नदियों की मिली हुई धारा, संगम।
|
|
3. मलय पवन
|
6. दक्षिणी भारत के मलय पर्वत से चलने वाली सुगंधित वायु।
|
|
4. सिंधु
|
8. समुद्र, एक नदी का नाम।
|
|
5. गंगा-यमुना
|
3. भारत की प्रसिद्ध नदियाँ।
|
|
6. रघुपति
|
5. श्री रामचंद्र का एक नाम, दशरथ के पुत्र।
|
|
7. श्रीकृष्ण
|
2. वसुदेव के पुत्र वासुदेव।
|
|
8. सीता
|
9. जनक की पुत्री जानकी।
|
|
9. गीता
|
7. एक प्रसिद्ध और प्राचीन ग्रंथ ‘श्रीमद्भगवद्गीता’, श्रीकृष्ण और अर्जुन के संवाद।
|
|
10. गौतम बुद्ध
|
1. एक प्रसिद्ध महापुरुष, बौद्ध धर्म के प्रवर्तक।
|
सोच-विचार के लिए
(क) उत्तर:
- कोयल कहाँ रहती है?
→ कोयल घनी अमराइयों (आम के बागों) में रहती है।
- तन-मन कौन सँवारती है?
→ मलय पर्वत से चलने वाली सुगंधित पवन (मलय पवन) तन-मन को सँवारती है।
- झरने कहाँ से झरते हैं?
→ झरने पहाड़ियों से झरते हैं।
- श्रीकृष्ण ने क्या सुनाया था?
→ श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता सुनाई थी।
- गौतम ने किसका यश बढ़ाया?
→ गौतम बुद्ध ने अपनी जन्मभूमि का यश बढ़ाया।
(ख) उत्तर:
“नदियाँ लहर रही हैं, पग पग छहर रही हैं”
- कहाँ-कहाँ छटा छहर रही है?
→ पूरे देश में, पग-पग पर (हर जगह) छटा छहर रही है।
- किसका पानी लहर रहा है?
→ गंगा, यमुना और त्रिवेणी जैसी पवित्र नदियों का पानी लहर रहा है।
मिलान
|
स्तंभ 1 स्तंभ 2
|
|
|
1. वह जन्मभूमि मेरी, वह मातृभूमि मेरी। → 2. मैंने उस भूमि पर जन्म लिया है। वह भूमि मेरी माँ समान है।
|
|
|
2. चिड़ियाँ चहक रही हैं, हो मस्त झाड़ियों में। → 3. वहाँ की जलवायु इतनी सुखदायी है कि पक्षी पेड़-पौधों के बीच प्रसन्नता से गीत गा रहे हैं।
|
|
|
3. अमराइयाँ घनी हैं, कोयल पुकारती है। → 1. यहाँ आम के घने उद्यान हैं, जिनमें कोयल आदि पक्षी चहचहा रहे हैं।
|
|
शब्दों के रूप **** 6
शब्दों के अर्थ:
- घर-घर
→ हर घर, सभी घरों में।
(उदाहरण: घर-घर में दीप जलते हैं।)
- बाल-बाल
→ बहुत मामूली रूप से, किसी बड़े संकट से बच जाना।
(उदाहरण: वह बाल-बाल बच गया।)
- साँस-साँस
→ हर साँस, जीवन के हर क्षण में।
(उदाहरण: साँस-साँस में तुम्हारी यादें बस गई हैं।)
- देश-देश
→ हर देश, सभी देशों में।
(उदाहरण: देश-देश में उनकी प्रसिद्धि फैल गई।)
- पर्वत-पर्वत
→ हर पर्वत, सभी पर्वतों में।
(उदाहरण: पर्वत-पर्वत में बर्फ जमी है।)
***** question
one-mark or one-line questions based on *** chapter:
- प्रश्न: "मातृभूमि" कविता के लेखक कौन हैं?
उत्तर: सोहनलाल द्विवेदी
- प्रश्न: "मातृभूमि" कविता में 'पग पग छहर रही हैं' का क्या अर्थ है?
उत्तर: हर कदम पर सुंदरता और गौरव फैल रहे हैं।
- प्रश्न: 'मातृभूमि' कविता में किस प्राकृतिक तत्व का वर्णन किया गया है?
उत्तर: हिमालय, नदियाँ, झरने, और अमराइयाँ
- प्रश्न: 'मलय पवन' कविता में किसका प्रतीक है?
उत्तर: दक्षिण भारत की ठंडी और सुगंधित हवा
- प्रश्न: 'सीता' कविता में किस रूप में प्रस्तुत की गई हैं?
उत्तर: जनक की पुत्री, आदर्श नारी
- प्रश्न: 'सिंधु' शब्द कविता में किसे संदर्भित करता है?
उत्तर: समुद्र या प्राचीन समय में नदी
- प्रश्न: 'रघुपति' शब्द कविता में किसका संदर्भ है?
उत्तर: भगवान श्रीराम
- प्रश्न: कविता में 'गंगा यमुन' किसे संदर्भित करता है?
उत्तर: भारत की दो प्रमुख नदियाँ, गंगा और यमुनाएँ
- प्रश्न: 'गौतम बुद्ध' ने मानवता को क्या सिखाया?
उत्तर: करुणा और अहिंसा
- प्रश्न: 'हिमालय' शब्द कविता में किसे दर्शाता है?
उत्तर: भारत के उत्तर में स्थित विशाल पर्वत
यहाँ कविता "मातृभूमि" पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ Paragraph Base } दिए जा रहे हैं, प्रत्येक के साथ उत्तर भी दिया गया है:
अनुच्छेद 1
ऊंचा खड़ा हिमालय
आकाश चूमता है,
नीचे चरण तले झुक,
नित सिंधु झूमता है।
गंगा यमुन त्रिवेणी
नदियां लहर रही हैं,
जग में छटा निराली,
पग पग छहर रही हैं।
प्रश्न 1:
कविता में 'हिमालय' को किस प्रकार चित्रित किया गया है?
A) एक शांत पहाड़ के रूप में
B) आकाश को छूते ऊँचे पर्वत के रूप में
C) समुद्र के समीप खड़े पर्वत के रूप में
D) धरती के नीचे स्थित पर्वत के रूप में
उत्तर: B) आकाश को छूते ऊँचे पर्वत के रूप में
प्रश्न 2:
कविता में 'सिंधु' का वर्णन किस प्रकार किया गया है?
A) वह शांत है
B) वह स्थिर खड़ा है
C) वह झुककर झूमता है
D) वह सूख गया है
उत्तर: C) वह झुककर झूमता है
प्रश्न 3:
'गंगा यमुन त्रिवेणी' किस बात का प्रतीक है?
A) पर्वतीय स्थल का
B) भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक एकता का
C) युद्ध का
D) कृषि क्षेत्र का
उत्तर: B) भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक एकता का
प्रश्न 4:
'जग में छटा निराली' पंक्ति से क्या तात्पर्य है?
A) पूरी दुनिया भारत से डरती है
B) भारत की सुंदरता अद्वितीय है
C) भारत की जलवायु खराब है
D) भारत में अंधकार फैला हुआ है
उत्तर: B) भारत की सुंदरता अद्वितीय है
प्रश्न 5:
‘पग पग छहर रही हैं’ पंक्ति का आशय क्या है?
A) हर कदम पर दुःख है
B) भारत में युद्ध हो रहा है
C) हर स्थान पर सुंदरता और आभा बिखरी है
D) कहीं कुछ खास नहीं है
उत्तर: C) हर स्थान पर सुंदरता और आभा बिखरी है
अनुच्छेद 2
जन्मे जहां थे रघुपति,
जन्मी जहां थी सीता,
श्री कृष्ण ने सुनाई,
वंशी पुनीत गीता।
गौतम ने जन्म लेकर,
जिसका सुयश बढ़ाया,
जग को दया सिखाई,
जग को दिया दिखाया।
प्रश्न 1:
'रघुपति' से यहाँ किसका संकेत किया गया है?
A) रामकृष्ण परमहंस
B) भगवान राम
C) महात्मा गांधी
D) राजा दशरथ
उत्तर: B) भगवान राम
प्रश्न 2:
कविता के अनुसार श्रीकृष्ण ने क्या सुनाया?
A) रामायण
B) महाभारत
C) गीता
D) वेद
उत्तर: C) गीता
प्रश्न 3:
गौतम ने संसार को क्या सिखाया?
A) युद्ध करना
B) राजनीति
C) दया
D) व्यापार
उत्तर: C) दया
प्रश्न 4:
'वंशी पुनीत गीता' पंक्ति का क्या तात्पर्य है?
A) श्रीकृष्ण की बंसी से गीता का पाठ हुआ
B) गीता को वंशी पर लिखा गया
C) श्रीकृष्ण ने बंसी बजाकर युद्ध किया
D) वंशी और गीता दोनों नष्ट हो गए
उत्तर: A) श्रीकृष्ण की बंसी से गीता का पाठ हुआ
प्रश्न 5:
‘जग को दिया दिखाया’ पंक्ति का क्या अभिप्राय है?
A) अंधेरे में दीपक जलाया गया
B) संसार को सच्चे मार्ग की ओर प्रेरित किया गया
C) एक टॉर्च दी गई
D) बिजली का आविष्कार हुआ
उत्तर: B) संसार को सच्चे मार्ग की ओर प्रेरित किया गया
EXTRA QUESTION ANSWERS
प्रश्न-अभ्यास
प्रश्न 1: कविता में वर्णित भारत की प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
कविता में भारत की प्राकृतिक सुंदरता का बहुत सुंदर चित्रण किया गया है। यहाँ ऊँचा हिमालय पर्वत आकाश को छूता है, समुद्र (सिंधु) चरणों में झुककर झूमता है। गंगा, यमुना और त्रिवेणी जैसी पवित्र नदियाँ लहराती हुई बहती हैं। हर स्थान पर निराली छटा बिखरी हुई है। यह भूमि सुंदरता और पवित्रता की प्रतीक है।
प्रश्न 2: कविता में किन महापुरुषों का उल्लेख हुआ है?
उत्तर:
कविता में भगवान राम (रघुपति), सीता, भगवान श्रीकृष्ण, और गौतम बुद्ध का उल्लेख हुआ है। इन महापुरुषों ने भारत भूमि पर जन्म लेकर इसे गौरवमयी बनाया और दुनिया को धर्म, करुणा और सच्चाई का मार्ग दिखाया।
प्रश्न 3: 'जग को दिया दिखाया' का क्या अर्थ है?
उत्तर:
'जग को दिया दिखाया' का अर्थ है कि भारत भूमि पर जन्मे महापुरुषों ने अपने ज्ञान और उपदेशों से संसार को सच्चाई, करुणा और मानवता का प्रकाश दिया। उन्होंने अज्ञानता के अंधकार को दूर कर लोगों को सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
प्रश्न 4: इस कविता से आपको क्या संदेश मिलता है?
उत्तर:
इस कविता से हमें अपनी मातृभूमि पर गर्व करने का संदेश मिलता है। यह भूमि केवल प्राकृतिक सौंदर्य से ही नहीं, बल्कि यहाँ जन्मे महापुरुषों की वजह से भी महान है। हमें अपनी संस्कृति, परंपरा और देश की गरिमा को बनाए रखना चाहिए।