गोल
✦ संक्षिप्त सारांश (Brief Summary):
पाठ "गोल" महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के जीवन से जुड़ा संस्मरण है। इसमें बताया गया है कि कैसे ध्यानचंद ने कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर भारत को हॉकी में विश्वविजेता बनाया।
ध्यानचंद की खेल के प्रति लगन, अनुशासन और समर्पण ने उन्हें 'हॉकी का जादूगर' बना दिया। वे गोल करने में इतने माहिर थे कि गेंद जैसे उनकी स्टिक से चिपकी रहती थी। इस पाठ में एक प्रसंग के माध्यम से यह दिखाया गया है कि कैसे उन्होंने अपने खेल से दर्शकों और विरोधियों को चकित कर दिया।
यह पाठ न केवल खेल भावना और राष्ट्रीय गर्व की मिसाल है, बल्कि यह भी सिखाता है कि निरंतर अभ्यास, लगन और देशभक्ति से हम कोई भी लक्ष्य (गोल) हासिल कर सकते हैं।
✦ लेखक जीवन परिचय (ध्यानचंद):
- नाम: मेजर ध्यानचंद
- जन्म: 29 अगस्त 1905, इलाहाबाद
- विशेषता: हॉकी के विश्वविख्यात खिलाड़ी, ‘हॉकी का जादूगर’ कहलाए
- उपलब्धियाँ: भारत को तीन बार ओलंपिक (1928, 1932, 1936) में स्वर्ण पदक दिलाए
- सम्मान: उनकी स्मृति में हर साल 29 अगस्त को 'राष्ट्रीय खेल दिवस' मनाया जाता है।
- निधन: 3 दिसंबर 1979
NCERT SOLUTION
मेरी समझ से
यह प्रश्न कक्षा 6 हिंदी के पाठ "हॉकी का जादूगर" (मेजर ध्यानचंद पर आधारित) से लिया गया है। नीचे दोनों प्रश्नों के सही उत्तर दिए गए हैं और सही विकल्प के आगे तारा () लगाया गया है:
(1)
“दोस्त, खेल में इतना गुस्सा अच्छा नहीं। मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है। अगर तुम मुझे हॉकी नहीं मारते तो शायद मैं तुम्हें दो ही गोल से हराता।”
इस बात से मेजर ध्यानचंद के बारे में क्या पता चलता है?
- वे अत्यंत क्रोधी थे।
- वे अच्छे ढंग से बदला लेते थे।
- उन्हें हॉकी से मारने पर वे अधिक गोल करते थे।
- वे जानते थे कि खेल को सही भावना से खेलना चाहिए।
✅ सही उत्तर: वे जानते थे कि खेल को सही भावना से खेलना चाहिए।
(2)
लोगों ने मेजर ध्यानचंद को ‘हॉकी का जादूगर’ क्यों कहना शुरू कर दिया?
- उनके हॉकी खेलने के विशेष कौशल के कारण
- उनकी हॉकी स्टिक की अनोखी विशेषताओं के कारण
- हॉकी के लिए उनके विशेष लगाव के कारण
- उनकी खेल भावना के कारण
✅ सही उत्तर: उनके हॉकी खेलने के विशेष कौशल के कारण
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मिलान सूची:
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शब्द
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अर्थ या संदर्भ
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1. लांस नायक
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2. भारतीय सेना का एक पद (रैंक) है।
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2. बर्लिन ओलंपिक
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4. वर्ष 1936 में जर्मनी के बर्लिन शहर में आयोजित ओलंपिक खेल प्रतियोगिता, जिसमें 49 देशों ने भाग लिया था।
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3. पंजाब रेजिमेंट
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5. स्वतंत्रता से पहले अंग्रेज़ों की भारतीय सेना का एक दल।
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4. सैपर्स एंड माइनर्स टीम
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6. अंग्रेज़ों के समय का एक हॉकी दल।
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5. सुबेदार
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1. स्वतंत्रता से पहले सबेदार भारतीय सैन्य अधिकारियों का दूसरा सबसे बड़ा पद था।
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6. छावनी
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3. सैनिकों के रहने का क्षेत्र।
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पंक्तियों का अर्थ और विचार
(क)
पंक्ति:
“बड़ा काम करने वाला आदमी हर समय इस बात से डरता रहता है कि उसके साथ भी बुराई की जाएगी।”
अर्थ और विचार:
इस पंक्ति का अर्थ है कि जो व्यक्ति ईमानदारी और मेहनत से अच्छा काम करता है, उसे यह डर भी बना रहता है कि कहीं कोई उसके साथ गलत न कर दे या उसकी अच्छाई का फायदा न उठा ले। वह अपनी छवि और मेहनत की कद्र चाहता है और इसीलिए हमेशा सतर्क रहता है। यह पंक्ति जीवन की एक सच्चाई को दर्शाती है—ईमानदार और जिम्मेदार लोग अक्सर दूसरों की गलत नीयत से चिंतित रहते हैं।
(ख)
पंक्ति:
“मेरी तो हमेशा यह कोशिश रहती कि मैं गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने किसी साथी खिलाड़ी को दे दूँ कि उसे गोल करने का श्रेय मिल जाए। अपनी इसी खेल भावना के कारण मैंने दुनिया के खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया।”
अर्थ और विचार:
इस पंक्ति से मेजर ध्यानचंद की महानता और उनकी टीम भावना (team spirit) का पता चलता है। वे व्यक्तिगत सफलता की बजाय टीम की जीत को ज़्यादा महत्त्व देते थे। वे चाहते थे कि उनके साथी खिलाड़ी भी सम्मान और प्रशंसा पाएँ। इस निःस्वार्थ भावना के कारण ही उन्होंने पूरी दुनिया के खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया। यह सिखाता है कि सच्चा खिलाड़ी वह है जो मिल-जुलकर खेले और सफलता को साझा करे।
सोच-विचार के लिए PAGE 18
(क) ध्यानचंद की सफलता का क्या रहस्य था?
➡️ मेजर ध्यानचंद की सफलता का सबसे बड़ा रहस्य था उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन, खेल के प्रति समर्पण और सच्ची खेल भावना। वे न सिर्फ खेल में उत्कृष्ट थे, बल्कि वे मैदान पर और बाहर भी ईमानदारी, सहयोग और विनम्रता के प्रतीक थे। वे हर दिन अभ्यास करते थे और कभी घमंड नहीं करते थे। यही गुण उन्हें एक महान खिलाड़ी बनाते हैं।
(ख) किन बातों से ऐसा लगता है कि ध्यानचंद स्वयं से पहले दूसरों को रखते थे?
➡️ मेजर ध्यानचंद की टीम भावना से यह स्पष्ट होता है कि वे दूसरों को स्वयं से पहले रखते थे।
वे कहते हैं कि “मैं गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने साथी खिलाड़ी को दे देता ताकि उसे गोल करने का श्रेय मिल जाए।”
इससे यह सिद्ध होता है कि वे अपनी सफलता से ज़्यादा टीम की सफलता और साथियों के सम्मान को महत्त्व देते थे।
वे सच्चे सहयोगी, विनम्र और निःस्वार्थ खिलाड़ी थे, जो अपनी नहीं, पूरी टीम की जीत में विश्वास रखते थे।
शब्दों के जोड़े, विभिन्न प्रकार -- शब्द-युग्मों (शब्दों के जोड़े) के उदाहरण दिए गए हैं:
(क) एक जैसे शब्दों के शब्द-युग्म (जैसे-जैसे, वैसे-वैसे जैसे):
इनमें एक ही शब्द दो बार आता है और बीच में योजक चिह्न (–) होता है।
- धीरे–धीरे
- दिन–दिन
- बार–बार
- कभी–कभी
- साल–साल
(ख) भिन्न शब्दों के शब्द-युग्म (जैसे: धक्का–मुक्की, नोंक–झोंक):
इनमें दोनों शब्द अलग होते हैं, लेकिन मिलकर एक विशेष अर्थ देते हैं।
- आगा–पीछा
- ऊँच–नीच
- सुख–दुख
- हिल–मिल
- चाल–ढाल
बात पर बल देना PAGE 19
आपने बिलकुल सही पहचाना! "मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है।" और "मैंने तो अपना बदला ले लिया है।" में "ही" का उपयोग, पहले वाक्य में बात पर बल देने के लिए किया गया है, जिससे यह वाक्य अधिक दृढ़ और महत्व का प्रतीत होता है। बिना "ही" के वाक्य का अर्थ थोड़ा सामान्य और हल्का लगता है।
बात पर बल देने के लिए शब्दों का प्रयोग (जैसे: ‘ही’, ‘भी’, ‘तो’):
यह शब्द वाक्य में विशेष बल डालते हैं और यह दर्शाते हैं कि वक्ता अपनी बात पर जोर दे रहा है।
पाठ में से कुछ वाक्य (जिनमें 'ही', 'भी', 'तो' शब्द हैं):
- "मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है।"
प्रभाव: यहाँ ‘ही’ शब्द से यह जताया गया है कि वक्ता अपने बदले को पूरी तरह से पूरा कर चुका है। बिना 'ही' के वाक्य हल्का प्रतीत होता।
- "मैंने भी तुम्हारी मदद की है।"
प्रभाव: यहाँ 'भी' शब्द यह दर्शाता है कि वक्ता भी किसी कार्य में शामिल है, जो पहले से किए गए कामों के साथ समान है। बिना 'भी' के यह वाक्य सामान्य हो जाएगा और यह नहीं दिखेगा कि वक्ता किसी विशेष कार्य में भागीदार है।
- "तुम तो बड़े साहसी हो!"
प्रभाव: 'तो' शब्द से इस वाक्य में व्यक्ति की साहसिकता पर जोर दिया गया है, जैसे यह कोई विशेष गुण है। बिना 'तो' के वाक्य साधारण लगता है।
यदि ये शब्द वाक्य में न होते, तो उनके अर्थ में सूक्ष्म सा अंतर आ जाता, और वाक्य में वह शक्ति या बल नहीं होता। यह विशेष शब्द वाक्य के भाव को और स्पष्ट और प्रभावशाली बना देते हैं।
EXTRA QUESTION ONE MARKS
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
प्रश्न 1: 'मैं' पट्टी बांधकर क्यों मैदान में लौटा?
उत्तर: 'मैं' घायल हो गया था, इसलिए उसने पट्टी बंधवाई और कुछ देर बाद फिर से मैदान में खेलने के लिए लौटा।
प्रश्न 2: 'मैं' ने साथी खिलाड़ी से क्या कहा?
उत्तर: 'मैं' ने साथी खिलाड़ी की पीठ पर हाथ रखकर कहा – "तुम चिंता मत करो, इसका बदला मैं जरूर लूंगा।"
प्रश्न 3: 'मैं' की बात सुनकर सामने वाला खिलाड़ी क्यों घबरा गया?
उत्तर: क्योंकि उसे लगा कि 'मैं' अब उससे बदला लेने के लिए हॉकी स्टिक से हमला कर सकता है, इसलिए वह डरा हुआ रहने लगा और हर समय 'मैं' की हरकतें देखने लगा।
प्रश्न 4: लेखक साथी खिलाड़ी को गेंद क्यों देना चाहता था?
उत्तर:
लेखक चाहता था कि गोल करने का श्रेय उसके साथी खिलाड़ी को मिले, इसलिए वह उसे गेंद देना चाहता था।
प्रश्न 5: लेखक की सोच हार और जीत को लेकर क्या थी?
उत्तर:
लेखक का मानना था कि हार या जीत किसी एक खिलाड़ी की नहीं होती, बल्कि पूरे देश की होती है।
प्रश्न 6: लेखक की खेल भावना से क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर:
लेखक की खेल भावना ने दुनिया के खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया।
1. रिक्त स्थान पूर्ति (Fill in the Blanks)
प्रश्न:
- लेखक खेलते समय हमेशा यह सोचता कि हार या जीत __________ की है।
- वह गेंद को गोल के पास ले जाकर __________ खिलाड़ी को देना चाहता था।
- लेखक की __________ भावना ने लोगों का दिल जीत लिया।
- मैदान में लौटते ही लेखक ने कहा – "इसका __________ मैं जरूर लूंगा।"
- घबराया हुआ खिलाड़ी बार-बार लेखक को __________ लगा।
उत्तर:
- देश
- साथी
- खेल
- बदला
- देखने
2. सही-गलत (True/False)
प्रश्न:
- लेखक सिर्फ अपने लिए गोल करना चाहता था। ❌
- लेखक का मानना था कि जीत पूरे देश की होती है। ✅
- लेखक बदले की भावना से हॉकी खेलता था। ❌
- लेखक ने खेल भावना से सभी का दिल जीत लिया। ✅
- लेखक मैदान में चोट लगने के बाद वापस नहीं आया। ❌
MCQ प्रश्नोत्तरी: PARAGRAPH BASE
अनुच्छेद 1
थोड़ी देर बाद मैं पट्टी बांधकर फिर मैदान में आ पहुंचा। आते ही मैंने उसे खिलाड़ी की पीठ पर हाथ रख कर कहा, "तुम चिंता मत करो इसका बदला मैं जरूर लूंगा।" मेरे इतना कहते ही वह खिलाड़ी घबरा गया। अब हर समय मुझे ही देखता रहता कि मैं कब उसके सिर पर हॉकी की स्टिक मारने वाला हूं।
MCQ प्रश्नोत्तरी:
प्रश्न 1: 'मैं' मैदान में क्यों लौटा?
A) खेलने का मन नहीं था
B) चोट लगने के बाद पट्टी बंधवाकर लौटा
C) अभ्यास करने आया था
D) किसी को ढूंढने आया था
✅ उत्तर: B) चोट लगने के बाद पट्टी बंधवाकर लौटा
प्रश्न 2: 'मैं' ने साथी खिलाड़ी से क्या कहा?
A) तुम खेल से बाहर हो जाओ
B) मैं तुम्हारी मदद नहीं करूंगा
C) इसका बदला मैं जरूर लूंगा
D) मुझे अब डर लग रहा है
✅ उत्तर: C) इसका बदला मैं जरूर लूंगा
प्रश्न 3: 'मैं' की बात सुनकर विरोधी खिलाड़ी का क्या हाल हुआ?
A) खुश हो गया
B) घबरा गया
C) मैदान छोड़कर भाग गया
D) हँसने लगा
✅ उत्तर: B) घबरा गया
प्रश्न 4: विरोधी खिलाड़ी हर समय क्या देखने लगा?
A) स्कोरबोर्ड
B) गेंद
C) 'मैं' कब उस पर हमला करेगा
D) दर्शकों की प्रतिक्रिया
✅ उत्तर: C) 'मैं' कब उस पर हमला करेगा
प्रश्न 5: इस अनुच्छेद से खेल भावना के साथ कौन-सी भावना झलकती है?
A) घृणा
B) डर और मजाक
C) ईर्ष्या
D) उदासी
✅ उत्तर: B) डर और मजाक
अनुच्छेद 2
मेरी तो हमेशा यह कोशिश रहती कि मैं गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने किसी साथी खिलाड़ी को दे दूं ताकि उसे गोल करने का श्रेय मिल जाए। अपनी इसी खेल भावना के कारण मैं दुनिया के खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया। खेलते समय मैं हमेशा इस बात का ध्यान रखता था कि हर या जीत मेरी नहीं बल्कि पूरे देश की है।
MCQ प्रश्नोत्तरी:
प्रश्न 1: लेखक की कोशिश किस बात की रहती थी?
A) वह खुद ही गोल करे
B) वह गेंद गोल के बाहर मारे
C) वह गेंद साथी खिलाड़ी को दे ताकि वह गोल करे
D) वह दर्शकों से तालियाँ बजवाए
✅ उत्तर: C) वह गेंद साथी खिलाड़ी को दे ताकि वह गोल करे
प्रश्न 2: लेखक ने खेलते समय किस भावना को प्राथमिकता दी?
A) प्रतियोगिता
B) प्रसिद्धि
C) खेल भावना
D) मुकाबला जीतने की जिद
✅ उत्तर: C) खेल भावना
प्रश्न 3: लेखक के अनुसार हार या जीत किसकी होती है?
A) कप्तान की
B) केवल गोल करने वाले की
C) लेखक की
D) पूरे देश की
✅ उत्तर: D) पूरे देश की
प्रश्न 4: लेखक ने किसका दिल जीत लिया?
A) अपने देशवासियों का
B) दुनिया के खेल प्रेमियों का
C) अपने शिक्षक का
D) टीम के कोच का
✅ उत्तर: B) दुनिया के खेल प्रेमियों का
प्रश्न 5: लेखक अपने साथी खिलाड़ी को गेंद क्यों देना चाहता था?
A) खुद आराम करने के लिए
B) उसे आगे दौड़ने में मज़ा आता था
C) उसे गोल करने का श्रेय मिले
D) वह खुद डरपोक था
✅ उत्तर: C) उसे गोल करने का श्रेय मिले